प्रेग्नेंसी के बाद अनियमित पीरियड्स: रखिए ध्यान

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बच्चा आने के बाद (post pregnancy)आपका जीवन पूरी तरह से बदल जाता है। ऐसे में शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक बदलाओँ का आना स्वाभाविक होता है। शरीर में हार्मोंस (hormone level)का स्तर भी बदलता है जिसके परिणामस्वरूप कई नए लक्षण सामने आने लगते हैं। अनियमित माहवारी (irregular menstrual cycle) भी इनमेँ से एक है। बच्चे के जन्म के बाद जो सबसे आम लक्षण सामने आता है, वह है एम्नोरिया अथवा माहवारी नहीँ आना। अगर आप स्तनपान करा रही हैं तो आपकी माहवारी पूरी तरह से गायब भी हो सकती है।

माहवारी चक्र का शरीर विज्ञान

physiology of menstrual cycle after pregnancy
जब कई हार्मोंस का मिश्रण मिलकर सन्युक्त रूप से कार्य करते हैं तब शरीर में तय समय पर निश्चित बदलाव आता है, जिसके परिणामस्वरूप हर महीने रक्तस्राव होता है। इसमेँ मुख्य रूप से चार तरह के हार्मोंस की भूमिका अहम होती है, जिनके नाम हैं एफएसएच (फोलिकल स्टिम्युलेटिंग हार्मोन), एस्ट्रोजन, एलएच (ल्युटिनाइजिंग हार्मोन) और प्रोजेस्टेरॉन।

शरीर में हार्मोंस के स्राव की शुरुआत हमारा दिमाग करता है। बाद में अंडाशय इसपर प्रतिक्रिया देता है और अंतरगर्भाशयकला की लाइनिंग विकसित होकर बहती है। ब्रेन मे पिट्यूटरी ग्रंथि एफएसएच का स्राव करती है। एफएसएच गर्भाशय को अंडे अथवा फ्लिकल बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है जिससे एस्ट्रोजन उत्पादित होता है। एस्ट्रोजन एंडोमेट्रियल लाइनिंग बनाता है। इसके बाद पूरे चक्र के मध्य में पिट्यूटरी से एलएच उत्पादित होता है जिससे अंडे रिलीज होते हैं और अंडोत्सर्ग होता है। अंडोत्सर्ग के बाद, फोलिकल कॉर्पस ल्युटम में बदलता है जिससे प्रोजेस्टेरॉन बनता है। एक निश्चित समय के बाद कॉर्पस ल्युटम मर जाते हैं और प्रोजेस्टेरॉन का उत्पादन रुक जाता है जिसके चलते रक्त में इसका स्तर कम हो जाता है। ऐसे में एंडोमेट्रियल लाइनिंग बिखरने लगती है और एक नए चक्र की शुरुआत होती है।
गर्भावस्था के बाद, यह सारी प्रक्रिया अनियमित हो जाती है और प्रोलैक्टिन नामक हार्मोन भी शरीर में स्रावित होने लगती है जिसकी वजह से माहवारी का चक्र दिस्टर्ब हो जाता है।

बच्चे के जन्म के तुरंत बाद पैटर्न

बच्चे के जन्म के तुरंत बाद, 10-15 दिनोँ तक गाढा लाल रक्त काफी ज्यादा मात्रा में आता है। इसके बाद धीरे-धीरे इसका रंग पीलापन लिए हुए गुलाबी और फिर भूरे रंग का स्राव होने लगता है। इसके बाद स्राव बंद होने से पहले यह पीलापन लिए हुए सफेद रंग में तब्दील हो जाता है। इस दौरान इसमेँ तेज महक भी हो सकती है। इस तरह के स्राव का आना-जाना अगले 6 हफ्ते तक जारी रह सकता है। यह प्रक्रिया अलग-अलग महिलाओँ में अलग तरह से दिख सकती है, अगर आपको कोई असामान्य लक्षण या समस्या नजर आती है तो अपने डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं। इससे जांच करके समस्या का पता लगाया जा सकता है।

इस टाइम आपको टैम्पून्स अथवा किसी भी प्रकार की अस्वच्छ वस्तु इस्तेमाल नही करनी चाहिए, क्योंकि इस समय संक्रमण होने का खतरा अधिक रहता है। आप कॉटन से कवर किए गए सैनिटरी नैपकिन इस्तेमाल कर सकती हैं अथवा खास तौर से डिजाइन किए गए मेटरनिटी नैपकिन इस्तेमाल कर सकती हैं जो बच्चे के जन्म के बाद होने वाले अधिक रक्तस्राव को मैनेज करने में काफी सहायक हो सकता है। अपना पैड हर 4-6 घंटे में बदल देँ क्योंकि योनि मार्ग से निकलने वाले डिसचार्ज की वजह से संक्रमण फैल सकता है।
बच्चे के जन्म के बाद ध्यान रखने वाले लक्षण
• बुखार
• लगातार लाल रंग का स्राव
• अचानक चटक लाल रंग का रक्तस्राव
• खराब महक
• गर्भाशय का सम्वेदनशील होना और दर्द

पीरियड्स की वापसी
अगर आप स्तनपान नही कराती हैं तो पीरियड्स बहुत जल्दी वापस आ जाते हैं, जैसे कि 10 हफ्ते के भीतर्। लेकिन स्तनपान कराने की स्थिति में आपके पीरियड्स एक से डेढ साल तक भी रुक सकते हैं। हालांकि हर किसी के मामले में पीरियड्स की वापसी अलग-अलग समय अर होती है ऐसे में एक सामान्य समय अंतराल का पूर्वानुमान लगाना बेहद कठिन है। लेकिन पीरियड्स नहीं आने का यह मतलब नहीं होता कि ओवुलेशन भी नहीं हो रहा है। स्तनपान के दौरान पिट्यूटरी ग्लैंड में प्रोलैक्टिन हार्मोन का उत्पादन प्रभावित होता है, जिससे ओवुलेशन अवरोधित होता है, लेकिन इस दौरान भी गर्भ धारण रोकने के लिए गर्भ निरोधक उपायोँ को अपनाना चाहिए। कई बार लैक्टेशनल एमेनोरिया के दौरान भी महिलाएँ गर्भवती हो जाती हैं। पीरियड्स वापस आने के बाद क्या हो सकता है
हेवी पीरियड्स-ऐसी हालत में आपको मोटा पैड या टैम्पून अथवा दोनो इस्तेमाल करना पड सकता है।
• अनियमित- आपका पीरियड साइकल बहुत लम्बा अथवा बहुत छोटा भी हो सकता है, जो आपके शरीर में हार्मोंस के स्तर पर निर्भर करता है।
• हल्का-कई बार पीरियड्स के दौरान सिर्फ कुछ धब्बे ही लग सकते हैं।
• पीरियड के दौरान दर्द
• पीएमएस- आपको मूड स्विंग हो सकता है, चिडचिडापन हो सकता है।
• डिलिवरी का तरीका- आपके बच्चे की डिलिवरी सिजेरियन हुई हो अथवा नॉर्मल इससे पीरियड के लौटने पर कोई फर्क नही पडता है। लेकिन अगर आपको किसी तरह कॉम्प्लिकेशन हुआ हो, जैसे कि हेमरेज, सेप्टिसीमिया अथवा एंडोमेट्राइटिस। ऐसे में गर्भाशय की रिकवरी की वजह से आपका पीरियड देर से वापस आ सकता है।
अनियमितता की वजहेँ
• हार्मोनल असंतुलन
• ओवेरियन सिस्ट
• संक्रमण
• तनाव
• कमजोरी
• ट्युमर
• थायरॉइड डिजॉस्टर

अपनाएँ ये उपाय
• डॉक्टर से सलाह लेँ
• हार्मोंस की जांच कराएँ
• प्रेग्नेंसी टेस्ट कराएँ
• अल्ट्रासाउंड
• स्वस्थ, संतुलित और पोषक आहार लेँ
• व्यायाम से आपका पीरियड सामान्य हो सकता है
• मेडिटेशन और योग
• तनाव कम करने की कोशिश करेँ
• आराम लेँ
• विटामिंस लेँ
• ताजी हवा मेँ टहलेँ
• अपनी मर्जी से दवाएँ न लेँ
• गर्भनिरोध के लिए ओरल पिल्स न लेँ
• वजन स्वस्थ सीमा में रखेँ। अगर आपका वजन जल्दी-जल्दी घटता-बढता है तो आपके पीरियड साइकल पर बुरा असर पड सकता है

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