तकिया से हो सकता है इंफेक्शन

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snoring-kills-fatloss-requiredसंक्रमण के कई कारण हो सकते है। लेकिन शायद ही आपने सोचा होगा कि तकिए से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है। अगर आप सोचते है कि हफ्ते मे एक या दो बार तकिए का गिलाफ या कवर बदलने मात्र से सफाई हो गई। और तकिए को स्वच्छ और सुरक्षित समझने की भूल करते हैं। जो कि संक्रमण से होने वाली बीमारियों का कारण बन जाता है।

हर दो साल मे बदलें तकिया

ब्रिटेन की संस्था द हाईजीन की डॉक्टर लीसा एकर्ले के अनुसार तकिए के जरिए होने वाले संक्रमणों के कारण तकिए को नजरअंदाज नही किया जा सकता। वे बताती है कि दो साल मे तकिए के वजन का दस फीसदी उसमे मौजूद धूल और मृत कोशिकाओं के कारण ही होती है। एक दिन मे हमारे शरीर से लाखों मृत कोशिकाएं निकलती हैं। जिनमें से कई तकिए पर ही रह जाती है क्योंकि औसतनएक व्यस्क 6-8 घण्टे का समय तकिए पर सोकर बिताता है।

इसके अलावा तकिए मे मौजूद धूल के कण भी संक्रमण के लिए जिम्मेदार बन सकते है। इससे अस्थमा के मरीजों की समस्या को बढ़ाने का काम करते हैं। अधिकतर बेड में घुन की मौजूदगी के कारण परेशानी बढ़ती है। डॉ लीसा के मुताबिक एलर्जी घुन से नहीं बल्कि उसके द्वारा छोड़ी गई गंदगी के कारण होती है। जिससे अस्थमा, नजला, आंखों में जलन, आंखों से पानी आना और कफ की समस्या हो सकती है।

कैसे रख सकते हैं तकियें को हाईजिनिक

तकिए से संक्रमण को दूर करने के लिए घर के अंदर का तापमान ठंडा रखें। हमेशा कमरे की सफाई करते समय वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करे। ताकि सफाई के दौरान धूल उड़कर तकिया पर न आएं।

सुबह के समय बिस्तर से चादर हटाने के कुछ देर बाद नए चादर बिछाए। इससे सूक्ष्म जीवाणु गर्माहट पाकर वापस नहीं पनपेंगे। इसके अलावा तकिया को धोकर मशीन के अंदर लगे ड्रायर में सूखाएं। जिससे ड्रायर की गर्मी के कारण सूक्ष्म जीवाणु खत्म हो जाते हैं।

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