प्रदूषण से बढ़ सकता है बांझपन का खतरा

Share:

pollution could increase infertilityइन दिनो प्रदूषण अपने उफान पर है। दिल्ली-एनसीआर में तो यह चरम स्तर पर पहुंच चुका है। डॉक्टर्स का मानना है कि ऐसी स्थिति में उच्च स्तर के प्रदूषक ऑक्सीडेटिव तनाव पैदा कर सकते हैं। प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियों (आरओएस) का निर्माण सेलुलर अंगों, डीएनए और कोशिका की दीवार को नुकसान पहुंचा सकता है।  जिससे महिलाओँ में अंडाणुओँ (eggs) और पुरुषोँ में शुक्राणुओं (sperm) की गुणवत्ता घट सकती है। हालांकि किसी अकेले प्रदूषक तत्व को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है मगर विविध कणों, भारी धातुओं और पॉलीसाइक्लिक सुगंधित हाइड्रोकार्बन प्रजनन क्षमता कम होने का कारण बन सकते हैं।

इंसान ही नहीं पशु भी होते हैं प्रभावित

फोर्टिस ला फेम हॉस्पिटल दिल्ली के आईवीएफ एवं इंफर्टिलिटी विभाग के निदेशक तथा फेडरेशन ऑफ ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया (फोग्सी) के महासचिव डॉ. ऋषिकेश डी पाइ कहते हैं, वायु प्रदूषण के कारण गेमेटोजेनेसिस के दौरान दोष उत्पन्न  होते हैं जिससे मानव एवं पशुओं दोनों में ही प्रजनन क्षमता में गिरावट आती है।

कई अन्य समस्याओँ के लिए जिम्मेदार

वायु प्रदूषक तत्वों से भरे वातावरण में रहने से गर्भ में बच्चे का सही विकास न होना, कम वजन के शिशु का जन्म, जन्म से पहले ही अथवा जन्म के कुछ समय बाद ही बच्चे की मृत्यु जैसी समस्याएँ भी बढ सकती हैं।

प्रदूषण कर सकता है हार्मोन्स में बदलाव

पीसीबी (पॉलीक्लोरीन बाइफेनिल्स) जैसे अवयव हार्मोन प्रणाली को बदल सकते हैं। एक अध्ययन के परिणाम यह भी संकेत देते हैं कि जो लोग लंबे समय तक प्रदूषकों के बीच सांस लेते हैं उनके रक्त में मुक्त कणों की अधिकता हो जाती हैं। इससे पुरुषों के शुक्राणुओं की गुणवत्ता कम हो जाती है।’

ला फेम ग्रेटर कैलाश-2 , फोर्टिस गुड्गांव के ब्लूम आईवीएफ सेंटर के फर्टिलिटी विभाग की निदेशक एवम फोग्सी की भावी अध्यक्ष डॉ. नंदिता पालशेटकर कहती हैं, पुरुषों और महिलाओं दोनों में बांझपन लगातार बढ़ रहा है। जीवन शैली में बदलाव, देर से गर्भधारण और वजन बढ़ने के अलावा, प्रदूषण भी चिंता के एक प्रमुख कारण के रूप में उभर रहा है। शहरों में रहना इस जोखिम को और बढ़ा देता है। प्रदूषक और हानिकारक तत्वों से एस्ट्रोजन का असर कम हो सकता है या फिर अचानक से बढ़ भी सकता है। इससे शरीर में एंड्रोजन हार्मोन का प्रभाव रुक सकता है। प्रजनन हार्मोन का संतुलन गड़बड़ा सकता है। प्रदूषण कुछ जीनों के काम करने के तरीकों को भी बदल सकता है।

एक ताजा शोध के मुताबिक, मेन रोड से 200 मीटर के दायरे में रहने पर बांझपन का जोखिम 11 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। शहरों में वायु प्रदूषण और वाहनों के धुएं का उच्च स्तर महिलाओं में प्रजनन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। हालांकि मानव शरीर का अपना रक्षा तंत्र है, लेकिन प्रदूषण जैसे बाहरी खतरों में सांस लेना या त्वचा के संपर्क में आने से प्रजनन स्वास्थ्य पर कुप्रभाव पड़ सकता है।

रासायनिक प्रदूषण के कारण होने वाले बांझपन को रोकने के लिए अपनाएँ ये टिप्स :

– प्रदूषण के स्तर से अवगत रहें, ताकि आप समय पर उचित कदम उठा सकें।

– घर में कुछ इनडोर पौधे भी लगायें ताकि प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों को कम करने में मदद मिल सके।

– घर में साफ-सफाई के लिए प्राकृतिक घरेलू क्लीनर का इस्तेमाल करें।

– प्रदूषण अधिक होने पर बाहर निकलना हो तो मास्क लगा सकते हैं।

– स्वस्थ आहार का प्रयोग करें जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहायता कर सके। पानी खूब पीएं ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे।

 

 

Share:

Leave a reply