पीपीटी है देश की सेहत का इलाज-डॉ. प्रसाद

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Dr Jagdish Prasad addressing the CII NextGen Healthcare Conference at New Delhi

देश की सेहत सुधारने का एक ही तरीका है। और वह है पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीटी)। औद्योगिक घरानों को इसके लिए आगे आना चाहिए। हर इंडस्ट्री को एक राज्य के एक जिले को एडॉप्ट करना चाहिए और वहाँ के प्राइमरी हेल्थ सेंटर और डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सेंटर मे मेडिकल सुविधाएं अपग्रेड करना चाहिए। इससे आम जनता तक बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाओं को आसानी से पहुंचाया जा सकेगा। यह सुझाव केन्द्रीय स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. जगदीश प्रसाद ने रखे हैं।

कनफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री द्वारा दिल्ली मे ‘नेक्स्टजेन हेल्थकेयर-रोडमैप: हेल्थकेयर फॉर आल’ विषय पर आयोजित सीआईआई कॉनक्लेव मे उन्होने इंडस्ट्री, कॉर्पोरेट और एनजीओ से अपील की कि वे हेल्थकेयर डिलिवरी सिस्टम, दवाओं के वितरण, हेल्थकेयर मे आईटी के इस्तेमाल मे सुधार और नई तकनीकें लाने मे सहयोग करें। उन्होने कहा कि सरकार फंड लगाने को तैयार है, मगर सप्लाई चेन मेंटेन करने मे सबका सहयोग चाहिए।

बेहतरी के लिए उन्होने 5 मंत्रालयों के संयोजन मे काम करने की जरूरत पर भी ज़ोर दिया। उन्होने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय, महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय, जल, शहरी स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्रालयों को साथ मिलकर काम करना होगा। फिलहाल हम सब आला-अलग अपने स्टार पर काम कर रहे हैं। ये पांचों मंत्रालय मिलकर संयुक्त अभियान चलाकर कहीं बेहतर ढंग से काम कर सकते हैं। उन्होने कहा कि डॉ तिहाई स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान तो साफ पीने का पानी और स्वच्छता कि व्यवस्था करके किया जा सकता है। इन सुविधाओं पर फोकस कर कई जलजनित (वॉटरबोर्न) और एयरबोर्न बीमारियों को भी कंट्रोल किया जा सकता है।

देश मे हर साल 390 लाख लोग बीपीएल कैटिगरी मे शामिल होते हैं, जिन्हें सस्ते इलाज के लिए महीनों चक्कर काटने पड़ते हैं। अगर इंडस्ट्री चाहे तो इस समस्या का इलाज आराम से कर सकती है। इसके लिए संबन्धित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को विश्वास मे लेकर विश्वस्तरीय सुविधाओं वाले अस्पताल छोटे शहरों मे खोल सकती है। अगर गरीबों के मदद की नियत से कोई कुछ नया करना चाहता है तो नियमों मे बदलाव से भी परहेज नहीं किया जाना चाहिए।

उदाहरण के तौर पर हमने देश के 238 जिलों को, यहाँ स्पेशियल कार्डिएक क्लीनिक खोलने के लिए चुना। मगर सिर्फ 37 सेंटर ही खुल पाए, जिनमे से अधिकतर साउथ इंडिया के हैं, इक्का-दुक्का राजस्थान और गुजरात के हैं। उत्तर भारत के अन्य राज्यों मे एक को भी योजना का लाभ नहीं मिल सका। 12वीं पंचवर्षीय योजना मे हमने 120 करोड़ की लागत से 20 नेशनल कैंसर सेंटर खोलने की योजना बनाई है। हर राज्य मे एम्स खोलने कि भी योजना है। हर सेंटर पर औसतन 50 करोड़ का बजट है। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री के मुख्य सलाहकार डॉ. रणजीत रॉय चौधरी ने कहा कि देश मे सबके लिए हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम जल्द शुरू की जाएगी। कार्यक्रम मे कॉनक्लेव के चेयरमैन हरपाल सिंह और श्रीकांत सोमनी भी मौजूद थे।

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