लीची खाने से मौत हो सकती है!

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Preventing Litchi Deaths: Mystery deaths solvedयह जानकर आपको आश्चर्य जरूर हुआ होगा, लेकिन यह सच है। मेडिकल जर्नल ‘लैंसेट’ में छपी एक रिपोर्ट में इस बात की पुश्टि हुई है। इस रिपोर्ट को नेशनल सेंटर फॉर डिजिज कंट्रोल और यूएस सेंटर फॉर डिजिज कंट्रोल ने मिलकर जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार लिची खाने से इंसान की मौत भी हो सकती है।

दरअसल बिहार के मुजफ्फरपुर, जो कि लिची उत्पादन के लिए जाना जाता हैं। वहाँ हो रही बच्चों की रहस्मयी मौतों के बाद ये रिसर्च की गई। यहां साल 2005, 2011 और 2014 बच्चों की रहस्मयी मौतें हुई। सिर्फ 2014 में 350 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा जिनमें से 122 बच्चों की मौत हो गई। मौत की वजह साफ नही हो पाई थी।

क्या कहती है रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार खाली पेट लिची खाने से इन बच्चों की मौत हुई। इस रिपोर्ट मे कहा गया है कि जिन बच्चों की मौत हुई उन्होने रात मे खाना नही खाया था और सुबह खाली पेट लिची खाई थी। रिपोर्ट मे कहा गया है कि लिची मे एक जहरीला तत्व होईपोग्लिसिन पाया जाता है। जो खून मे ग्लुकोज बनने की प्रक्रिया को रोक देता है। इस कारण दिमाग से सम्बंधित समस्याएं शुरु हो जाती हैं। चक्कर आते हैं बदन अकड़ जाता हैं और बच्चें बेहोश होने लगते हैं। स्थिती खराब होने पर बच्चों की मौत तक हो जाती हैं। 2014 हुई बच्चों की मौतों मे से 60 प्रतिशत बच्चों का ब्लड शुगर कम हो गया था।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने इस मामले में जागरुकता के प्रसार की पहल की है। एसोसिएशन के नेशनल प्रेजिडेंट डॉ. के. के. अग्रवाल का कहना है, आमतौर पर गरीब तबके के बच्चों के शरीर मे लिवर ग्लाइकोजेन कम मात्रा में होता है। मई-जून महीने में मुजफ्फरपुर इलाके में लीची की पैदावार काफी ज्यादा होती है। आसान उपलब्धता के चलते गरीब बच्चे दिन में पेट भर कर लिची खाते हैं और रात में बिना भोजन के ही सो जाते हैं। लीची में पाया जाने वाला हाइपोग्लिसिन ए और एमजीपीजी शरीर में नियो-ग्लूकोजेनेसिस की प्रक्रिया को ब्लॉक कर देता है। यही वजह है कि बच्चे गम्भीर हाइपोग्लाइसीमिया के शिकार हो जाते हैं।

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