स्किट्सफ्रीनीआ के 83 नए जींस की पहचान

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schizophrenia

दुनिया भर के वैज्ञानिक लंबे समय से स्किट्सफ्रीनीआ (सीजोफ़्रेनिया) की वजह तलाशने मे लगे हुए हैं, लेकिन अबतक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँच सके हैं। लेकिन अब इस दिशा मे एक उम्मीद की किरण नजर आई है। बीमारी की एक मोलिक्युलर जेनेटिक स्टडी मे वैज्ञानिकों ने स्किट्सफ्रीनीआ से संबन्धित 108 जींस की पहचान की है, जिनमे से 83 नए पहचाने गए जींस हैं। इससे बीमारी की वजह का पता लगाने और इलाज ढूँढने मे मदद मिल सकती है।
स्किट्सफ्रीनीआ एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिससे दिनीय भर मे करोड़ों लोग प्रभावित हैं। हर किसी मे इसके अलग-अलग लक्षण हो सकते हैं, लेकिन सबसे आम लक्षणों मे डिलुशन (मति भ्रम), हेलूसिनेशन, असामान्य विचार आने और शरीर के कंट्रोल मे न रहने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कई सालों की रिसर्च के बाद भी बीमारी की वजह का अब तक सही पता नहीं लग सका है। नई रिसर्च कार्डिफ़ यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन मे चल रही है। रिसर्च टीम के लीडर प्रो. मिशेल ओ’डोनोवम कहते हैं कि बीमारी की एक वजह का पता लगाना तकनीकी रूप से बहुत मुश्किल है। ऐसा कोई टेस्ट उपलब्ध नहीं है जिससे सिर्फ उन्हीं लोगों कि पहचान कर एक ग्रुप मे शामिल किया जाए जिनमे समस्या की समान वजह हो, इसका मतलब है कि हमे लोगों के एक ऐसे ग्रुप को रिसर्च मे शामिल करना पड़ता है जिन्हें शायद बीमारी के कई प्रकारों का असर होता है।
एक जैसी समस्या है। ऐसे मे वजहें आपस मे जुड़ नहीं पाती हैं।
उनका कहना है कि हम जीवित व्यक्ति के ब्रेन का टिश्यू लेकर जांच नहीं कर सकते। हमे मेडिसिन के परंपरागत तरीकों से ही पता लगाना पड़ता है] जो काफी कठिन है। जहां तक मरीजों से व्यक्तिगत बातचीत और इंटरव्यू का सवाल है तो इसके लिए भारी संख्या मे लोगों को नियुक्त करना होगा, जो काफी खर्चीला है। लेकिन नई रिसर्च से कुछ निश्चित जेनेटिक म्यूटेशन का पता लगा है। यह स्टडी आगे की खोज मे महत्वपूर्ण सकबित हो सकती है।

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