रोबोटिक आर्म से आसान हुआ प्रॉस्टेट कैंसर का इलाज

1949
0
Share:

robotic prostatectomy
रोबोटिक प्रॉस्टेटेक्टमी ने प्रॉस्टेट कैंसर के इलाज को बेहद आसान बना दिया है। इससे न सिर्फ इलाज ज्यादा एक्युरेट होता है बल्कि मरीज की रिकवरी भी जल्दी होती है, क्योंकि इसमे प्रॉस्टेट ग्लैण्ड निकालने के लिए बड़ा चीरा लगाने की जरूरत नहीं होती। प्रॉस्टेट कैंसर या प्रॉस्टेट ग्रंथि का कार्सिनोमा 65 साल से अधिक उम्र के पुरूषों को होने वाले सबसे आम कैंसर में से एक है। पिछले दो दशकों के दौरान, मेडिकल सर्जरी की दिशा में रिसर्चर्स ने काफी प्रगति की है, जिसमें प्रॉस्टेट कैंसर के इलाज के लिए रोबोटिक तकनीक भी खास है। रोबोटिक प्रॉस्टेटेक्टमी परंपरागत प्रॉस्टेट रिमूविंग सर्जरी के मुकाबले कई तरह से खास और फायदेमंद है।

क्या है प्रॉस्टेटेक्टमी
प्रॉस्टेटेक्टमी में पूरा प्रॉस्टेट ग्लैंड हटा दिया जाता है। यह उस केस में किया जाता है जिसमें बीमारी का शुरूआत में ही पता लग जाता है और यह पक्का होता है कि कैंसर ग्लैंड के बाहर तक नहीं फैला है। कई बार प्रॉस्टेट कैंसर बहुत धीरे-धीरे बढ़ता है, ऐसे मरीजों को इलाज की जरूरत नहीं होती, लेकिन ग्लैंड की नियमित जांच और देखरेख की जरूरत होती है।

इलाज के सर्जिकल विकल्पः परंपराग और रोबोटिक प्रॉस्टेटेक्टमी
ऐसे मामलों में जिनमें कैंसर का पता शुरूआत में ही लग जाता है, प्रॉस्टेट ग्रंथि और इसके आस-पास के कुछ टिश्यू हटाने के लिए सर्जिकल इंटरवेंशन किया जाता है। इससे प्रभावी रूप से कैंसर बाहर फैलने से रूक जाता है। रैडिकल प्रॉस्टेटेक्टमी के नाम से जाना जाने वाला यह प्रॉसीजर प्रॉस्टेट कैंसर के इलाज का सबसे आम तरीका है और कई तरीकों से पहले भी इस्तेमाल होता रहा हैः

ओपेन प्रॉस्टेटेक्टमीः इसमें एक बड़ा कट लगता है जो नाभि से लेकर प्युबिक बोन तक लगता है। ऐसे में यह समझा जा सकता है कि इसमें कितना ब्लड का नुकसान होता है, कितना दर्द झेलना पड़ता है और कट का घाव भरने में कितना लंबा समय लगता है।
लैप्रोस्कोपिक प्रॉस्टेटेक्टमीः इस तरीके में एक छोटा सा चीरा लगता है। ओपेन प्रॉस्टेटेक्टमी के मुकाबले बेहद कम ब्लड का नुकसान होता है और पेशेंट की रिकवरी बहुत जल्दी होती है।

रोबोटिक प्रॉस्टेटेक्टमीः द गेम चेंजर
प्रॉस्टेट कैंसर को रिमूव करने के लिए प्रॉस्टेट-असिस्टेड लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की दिशा में हुई नई प्रगति ने परंपरागत तरीके की तुलना में कई फायदे लाए हैं। मिनिमली इनवेसिव यानी कम चीरा लगाने वाली सर्जरी, रोबोटिक प्रॉस्टेटेक्टमी में कम ट्रामा होता है और मरीज की रिकवरी जल्दी होती है।

रोबोटिक प्रॉस्टेटेक्टमी में रोबोटिक इन्स्ट्रुमेंट से प्रॉसीजर किया जाता है। अपने हाथों से ऑपरेशन करने के बजाय, डॉक्टर इसमें स्टेट-ऑफ-द-आर्ट रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। इसमें ज्यादा स्पष्टता और नियंत्रण रहता है। यह सर्जिकल डिवाइस रेजोल्युशन कैमरा से लैश होता है जिसमें 10 गुना ज्यादा मैग्निफाइड होगा जिससे प्रॉस्टेट और उसके आस-पास के नर्व्ज और टिश्यूज का 3 डाइमेंशन इमेज दिखाई देता है। इसके साथ ही माइक्रो-सर्जिकल इंस्टृमेंट इसे ज्यादा लचीला और घुमावदार बनाते हैं, जिससे किसी भी तरह की गलती होने का चांस नहीं रहता है।

सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें 1 से 2 सेंटीमीटर का चीरा लगाकर उसी के जरिए सर्जरी की जाती है। इससे ऑपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी भी तेजी से होती है। इस सर्जरी के लिए खास प्रशिक्षण वाले डॉक्टरों की जरूरत होती है, जो कि रोबोटिक प्रॉसीजर संबंधी सभी जानकारियों से लैश हों।
रोबोटिक आर्म कंप्यूटर द्वारा गाइड किए जाते हैं, ऐसे में नर्व्ज और प्रॉस्टेट ग्लैंड को कोई नुकसान होने का खतरा नहीं रहता, प्रॉसीजर के बाद इंपोटेंसी का खतरा कम रहता है, यह एक ऐसा रिस्क है जो परंपरागत प्रॉस्टेटेक्टमी सर्जरी में कई बार हो जाता है।

Written by
Dr. Sudhir Chadda,
Senior Urologist & Director & Vice Chairman,
Kidney Transplant Surgery, Sri Ganga Ram Hospital, New Delhi

Share:
0
Reader Rating: (0 Rates)0

Leave a reply