बच्चों से दूर ही रखें सैनीटाइजर

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triclosanअक्सर हम पानी की सुविधा न होने या आलस के कारण माता-पिता अपने बच्चों का हाथ साबुन से धोने के बजाए सैनीटाइजर्स थमा देते हैं। लेकिन माता-पिता की लापरवाही बच्चों के लिए घातक साबित हो सकती है। दरअसल वैज्ञानिकों ने एक शोध के बाद बताया कि इसके प्रयोग से पेट दर्द, मितली और उल्टी जैसी समस्याएं बच्चों में हो सकती है। क्योंकि सैनीटाइजर्स को बनाने में अल्कोहल का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा इन आम समस्याओं से बड़ी समस्या कोमा की भी है। सैनीटाइजर्स के इस्तेमाल से कोमा की समस्या भी हो सकती है। 

शोध के जरिए किया गया पता 

अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के वैज्ञानिकों ने 2011 से 2014 तक एक शोध किया। जिसमें बारह वर्ष तक के बच्चों पर शोध किया गया है। मौजूदा समय में बच्चों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला 90 फीसदी सैनीटाइजर्स अल्कोहल से बना होता है। स्कूल के समय इसका प्रयोग करने पर ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकता है। जबकि गर्मी के दिनों में सैनीटाइजर्स का इस्तेमाल करने पर नुकसान का दर कम हो जाता है।

क्या कहते है शोधकर्ता

शोधकर्ताओं ने बताया कि सैनीटाइजर्स के नुकसान में 90 फीसदी मामला पांच वर्ष से कम बच्चों में देखा गया। जबकि बड़े होते बच्चों में इसका नुकसान काफी कम हो जाता है। शोध में बताया कि कुछ बच्चों में स्वाश की गति धीमी पड़ जाती है। जबकि पांच मामलों में बच्चे कोमा में पहुँच गए हैं।

इसलिए शोधकर्ताओं ने लोगों को नसीहत दी है कि सैनीटाइजर्स का इस्तेमाल न करके सफाई के लिए साबुन और पानी का प्रयोग करें। बच्चों की पहुँच से सैनीटाइजर्स को दूर रखें।

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