सिजेरियन का बढ़ाता चलन

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यूँ तो हर औरत का सपना होता है कि वो एक माँ बने पर इस नए दौर में माँ बनने का दर्द कोई सहन नहीं करना चाहता। यही कारण है कि सिजेरियन का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। दरअसल एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में अमीर वर्ग के कारण ही सिजेरियन के मामलों में काफी वृद्धि हुई है। प्रसव पीड़ा से बचने के लिए महिलाएं और पैसे के लालच के लिए निजी अस्पताल सिजेरियन का पक्ष लेते हैं। 

दुनिया भर में सिजेरियन का चलन बढ़ा

रिपोर्ट के अनुसार देश में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में सिजेरियन का प्रचलन तेजी से बढ़ा है। साल 2010 में उच्च और माध्यम आय वर्ग वाले देशों में 35 लाख से 57 लाख सिजेरियन का मामला सामने आया है। जबकि इन मामलों में इसकी कोई जरूरत नहीं थी। जबकि गरीब देशों में 10 से 35 लाख प्रसव के मामले थे जिसमें सिजेरियन की जरूरत थी लेकिन पैसे की कमी के कारण सुविधा नहीं मिल पाई।

अंतराष्ट्रीय मेडिकल चिकित्सा जर्नल  ने मातृत्व स्वास्थ्य पर एक रिपोर्ट जारी किया है। जिसके अनुसार हमारे देश के अमीर वर्ग प्रसव पीड़ा से बचने के लिए सिजेरियन को महत्त्व देते हैं। इसके कारण  बीते 21 वर्ष में 2014 तक इस उच्च वर्ग में सिजेरियन की मामलों में  औसतन 10 फीसदी से बढ़कर 30 फीसदी तक पंहुच गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य नमूना सर्वेक्षण की 2015-16 के रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि की गई है।

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने सिजेरियन से प्रसव पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को सुझाव भेजा है।

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