खराब जीवनशैली बढा रही बांझपन

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पुरुषों और महिलाओं दोनों में,बांझपन (प्रजनन क्षमता का अभाव), इनदिनों काफी आम बात हो गयी है और पिछले पांच सालों में यह भारत में बहुत तेजी से बढ़ा है। बांझपन के प्रमुख कारण का पता लगाना एक जटिल प्रक्रिया है, और इसमें बहुत सारा रिसर्च और जांच-पड़ताल शामिल होती है। सिस्‍ट, फाइब्रोइड या हार्मोनल असंतुलन सरल एवं नजर आने वाली समस्‍या से लेकर बहुत जटिल आनुवांशिक रोग या कुछ पेशे से जुड़े खतरों जैसे कैमिकल पदार्थ या रेडियोएक्टिव तत्‍वों के संपर्क में आने तक; यह कुछ भी हो सकता है।   

बांझपन क्‍या है

बांझपन का मतलब है एक साल तक कोशिश करने के बाद गर्भवती न हो पाना। या,यदि महिला की उम्र 35 साल या इससे ज्‍यादा है तो यह अवधि 6 महीने है। वे महिलाएं गर्भवती हो सकती हैं लेकिन गर्भवती नहीं रह पाती हैं, उनमें भी बांझपन हो सकता है

गर्भवती होने के लिए:

महिला का अपने किसी एक अंडाशय (ओवरीज) से एक अंडा रिलीज करना अनिवार्य होता है (ओवुअलेशन)

अंडे का फैलोपियन ट्यूब के जरिए गर्भाशय तक जाना अनिवार्य होता है

पुरुष का स्‍पर्म/ शुक्राणु का रास्‍ते में अंडे के साथ मिलना (फर्टिलाइज करना) अनिवार्य होता है। फर्टिलाइज अंडे का अंडाशय के अंदर जुड़ा रहना अनिवार्य होता है (इंप्‍लान्‍टेशन)

महिलाओं में बांझपन के क्‍या कारण हैं?

महिलाओं में बांझपन के ज्‍यादातर मामलों में ओवुअलेशन (अंडा रिलीज होने) से जुड़ी समस्‍याओं के कारण होता है। कुछ संकेत बताते हैं कि महिला सामान्‍य तरीके से ओवुअलेशन (अंडे पैदा करना और उन्‍हें छोड़ना) नहीं कर पा रही है जिसमें पीरियड्स का अनियमित होना या नहीं होना शामिल है। ओवुअलेशन की समस्‍याएं अक्‍सर पोलीसिस्टिक ओवैरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) के कारण होती हैं। पीसीओएस हार्मोन असंतुलन की समस्‍या है जो सामान्‍य ओवुअलेशन को बाधित कर सकती है। पीसीओएस महिलाओं में बांझपन का सबसे आम कारण होती है प्राइमरी ओवैरियन इनसुफिसियन्‍सी (पीओआई) ओवुअलेशन समस्‍याओं का एक और कारण है। पीओआई तब होती है जब महिला का अंडाशय/ ओवरीज उसके 40 साल की होने से पहले ठीक से काम करना बंद कर देते हैं

 महिलाओं में बांझपन के अन्‍य कारण

 ·         पेल्विक में सूजन की बीमारी, इंडोमेट्रियोसिस, या एक्‍टोपिक प्रेग्‍नेंसी के लिए सर्जरी की वजह‍ से फैलोपियन ट्यूब्‍स का अवरुद्ध/ बाधित होना

·         गर्भाशय में फिजीकल समस्‍याएं जैसे फाइब्रोइड्स, पोलिप, एडिनोमायोसिस, आदि

·         इंडोमीट्रियोसि

 ·         टीबी

 .        थायोरॉइड या एड्रनल ग्‍लैंड में हार्मोन संबंधी गड़बड़, डायबिटीज आदि

 बांझपन के लिए लैप्रोस्‍कोपिक उपचार:

आज लैप्रोस्‍कोपी बांझपन के मरीजों के लिए वरदान बनकर आयी है क्‍योंकि इसमें केवल 1 दिन अस्‍पताल में रहना पड़ता है,जल्‍दी ही अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में लौटना, कम से कम खून बहना और कम से कम टांके लगने के कारण यह सर्जरी मरीजों के लिए बहुत ज्‍यादा फायदेमंद हो गयी है और साथ ही इससे गर्भ धारण करने की दर भी बहुत ज्‍यादा बढ़ जाती है।

बांझपन के लिए लैप्रोस्‍कोपी के दौरान:

 प्रक्रियाएं/ सर्जरी जो आसानी से की जाती हैं वे इस प्रकार हैं-

         लैप मायोमेक्‍टोमी- फाइब्रोइड्स को निकालना। अंडाशय को सरंक्षित कर दिया जाता है और फाइब्रोइड्स को हटाने के बादगर्भ धारण करने के लिए अनुकूल बना दिया जाता है।

         ईंडोमेट्रियोसिस का रीसैक्‍शन- ट्यूबल रीकंस्‍ट्रक्‍शन पिछले लैप्रो‍स्‍कोपिक लिगेशन का केस है जिसे ट्यूबल रीकैनालिसेशन के नाम से जाना जाता है।

         पीसीओडी ड्रिलिंग –पोलीसिस्टिक ओवैरियन सिंड्रोम के मरीजों के लिए जिन्‍हें केवल मेडीकल उपचार से लाभ नहीं मिल रहा है या इसका असर नहीं हो रहा है

        लैप अधीसियोलिसिस खासतौर से टीबी के मामलों में

       ट्यूब में म्‍यूकोसल ब्‍लॉक्‍स के लिए ट्यूबल कैन्‍यूलेशन

 –   हिस्‍टेरोस्‍कोपी:- जिसमें छोटे आकार के स्‍कोप से गर्भाशय की अंदरुनी कैविटी की जांच की जाती है और किसी प्रकार की गड़बड़ पाये जाने पर उसे ठीक किया जाता है।   

 – हिस्‍टेरियोस्‍कोपिक मायोमेक्‍टोमी जिसमें गर्भाशय की कैविटी के अंदर मौजूद फाइब्रोइड्स को स्‍पेशल इंस्‍ट्रूमेंट्स जैसे रीसेक्‍टोस्‍कोप या हिस्‍टेरोस्‍कोपिक मोर्सिलेटर्स के साथ उसी सेटिंग में हटा लिया जाता है

 – हिस्‍टेरियोस्‍कोपिक पोलीपेक्‍टोमी: पोलिप्‍स गर्भाशय के अंदर मौजूद हल्‍की ग्रोथ्‍स होती हैं जो बांझपन और हर वैजाइनम में अनियमित रक्‍तस्राव को बढ़ाते हैं।   

        सेप्‍टल रीसैक्‍शन: यूट्रीन सेप्‍टम गर्भाशय की कैविटी में एक असामान्‍य दीवार की मौजूदगी होती है जिसे हिस्‍टेरोस्‍कोपी के समय पर निकाल लिया जाता है ताकि बांझपन या मिसकैरिज/गर्भपात को रोका जा सके।

       हिस्‍टेरोस्‍कोपिक अधिसियोलिसिस एशर्मैन्‍स सिंड्रोम के लिए होती है: कभी-कभी गर्भाशय की कैविटी के अंदर मौजूदा टिश्‍यूज के छोटे-छोटे बैंड्स (सिनाकी) स्‍पेशल हिस्‍टेरोस्‍कोपिक सीजर्स से अलग किए जाते हैं

        हिस्‍टेरोस्‍कोपिक टयूबल कैन्‍युलेशन

 बातें जो आपको जाननी चाहि

महिलाओं में बांझपन के ज्‍यादातर मामलों को समझना बहुत आसान होता है, समस्‍या जानी-पहचानी है। शहरी भारत में तनाव बढ़ते बांझपन का एक और पहलू है। प्रोफेशनल का तनाव और अनियमित समय के साथ लंबे काम के घंटे मुख्‍य पहलू हैं। गर्भ धारण करने के तरीकों को बढ़ाने के लिए तनाव से निपटना महत्‍वपूर्ण है। प्रजनन क्षमता के लिए स्‍वस्‍थ लाइफस्‍टाइल बहुत जरुरी है। इस पर बहुत सारी स्‍टडीज हुई हैं जिनमें बांझपन के ज्‍यादातर मामले लाइफस्‍टाइल बीमारियों जैसे कि मोटापा बढ़ना, अनियमित पीरियड्स और ऐसे ही अनेक बीमारियों की वजह से हो रहे हैं।

मिथ

महिला का पीरियड साइकल 28 दिनों का होता है

तथ्य: सामान्‍य साइकल 21 से 36 दिनों तक कभी भी हो सकता है

स्‍पर्म/ शुक्राणुओं का जीवन कई घंटों का होता है

तथ्य: प्रजनन सर्विकल लिक्विड में, स्‍पर्म/शुक्राणु 5 दिनों तक जीवित रह सकते हैं

ज्‍यादा सेक्‍स इच्‍छा वाले पुरुष के स्‍पर्म/ शुक्राणुओं की संख्‍या सामान्‍य होगी

तथ्य: पुरुषों के लिए मर्दानगी और प्रजनन क्षमता के बीच कोई संबंध नहीं होता है और सामान्‍य सेक्‍स इच्‍छा वाले कुछ पुरुषों में बिल्‍कुल भी स्‍पर्म/ शुक्राणु नहीं हो सकते हैं।

रोजाना सैक् करने से गर्भधारण करने की संभावनाएं बढ़ जाती है।

तथ्य: ओवुअलेशन के समय पर,ज्‍यादातर महिला के साइकल/चक्र के 12-16 दिनों के बीच,हर दूसरे दिन सेक्‍स करना पर्याप्‍त रहता है क्‍योंकि स्‍पर्म/ शुक्राणु का जीवनकाल दो दिनों से ज्‍यादा का होता है

डॉ. अजय अग्रवाल, महिला रोग विशेषज्ञ एवं लैप्रोस्‍कोपिक सर्जन, सनराइज अस्‍पताल, नई दिल्‍ली

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