जानिए कॉस्मेटिक्स मे एसपीएफ का फंडा!

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sunscreen

क्रीम, हो या पाउडर, लिप्सटिक हो या फाउंडेशन, कंसीलर या लीप बाम, आजकल हर चीज मे एसपीएफ एवलेबल है। टीवी, रेडियो, न्यूजपेपर, मैगजीन और इंटरनेट भी सनस्क्रीन वाले कॉस्मेटिक्स के विज्ञापनों से पटे पड़े हैं। एक-दूसरे से आगे रहने की होड़ में हर ब्रांड अपनी अलग यूएसपी लेकर बाजार में आ रहा है। इतना ही नहीं, इन विज्ञापनों में कुछ इस तरह की कहानियां दिखाई जाती हैं कि हर कोई ऐसा सोचने लगे कि अगर इसे इस्तेमाल करे बिना बाहर निकल गए तो त्वचा की रौनक खोकर ही वापस आना है। आखिर क्या है यह एसपीएफ का फंडा। जाने के लिए हमने बात की एशियन इंस्टीट्यूट के सीनियर डर्मेटोलाजिस्ट डॉ. अमित बांगिया से।

एसपीएफ का फंडाः
एसपीएफ सूर्य की किरणों से बचाव का एक मानक शब्द है। यह एक रेटिंग फैक्टर है जो यह बताता है कि कोई सनस्क्रीन या सनब्लॉक आपको किस स्तर तक बचाव देता है। एसपीएफ रेटिंग का आधार सुरक्षित त्वचा पर सूरज की किरणों का असर होने में लगने वाले समय और बिना प्रोटेक्शन वाली स्किन पर सूर्य की किरणों के असर में लगने वाले समय की तुलना है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी को एक घंटा धूप में रहने से सनबर्न होता है तो एसपीएफ 15 उन्हें 15 घंटे धूप में रहने की फ्रीडम देगा, मतलब सनबर्न होने में 15 गुना अधिक समय लगेगा। मगर ऐसा तभी हो सकता है जब इन पूरे 15 घंटों में धूप का असर एक सा हो, जो कि संभव नहीं है। मसलन, सुबह के समय धूप का असर कम होता है, दोपहर में काफी ज्यादा।

सनस्क्रीन वर्सेज सनब्लॉकः
आप सोच रहे होंगे अगर सनस्क्रीन और सनब्लॉक दोनों सूरज की किरणों से सुरक्षा देते हैं तो इनमें फर्क क्या है। दरअसल अल्टृवायलेट किरणों की दो कैटिगरी होती है-यूवीए और यूवीबी। यूवीए किरणें ज्यादा खतरनाक होती हैं क्योंकि ये त्वचा पर लंबे समय तक रहने वाले असर छोड़ती हैं। दूसरी ओर यूवीबी किरणें सनबर्न और फोटो एजिंग के लिए जिम्मेदार होती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सनस्क्रीन यूवीबी किरणों को मामूली रूप से फिल्टर करता है जबकि सनब्लॉक में जिंक ऑक्साइड होता है जो दोनों तरह की किरणों से त्वचा को बचाव देता है।

फिजिकल सनस्क्रीन है बेहतर
मार्केट में दो तरह के सनस्क्रीन उपलब्ध हैं, फिजिकल सनस्क्रीन और केमिकल सनस्क्रीन। फिजिकल सनस्क्रीन का अधिकतम एसपीएफ 20 होता है, जिसमें केमिकल बेहद कम मात्रा में होता है, जबकि केमिकल सनस्क्रीन में 20 से ज्यादा एसपीएफ होता है और इसमें काफी अधिक मात्रा में केमिकल होता है। ऐसे में यह ध्यान रखें कि जितना ज्यादा एसपीएफ उतना ही ज्यादा केमिकल। चूंकि भारत अल्टृवायलेट किरणें ज्यादा खतरनाक स्तर तक नहीं हैं। ऐसे में यहां फिजिकल सनस्क्रीन का इस्तेमाल काफी है।

ऐसे करें सनस्क्रीन का इस्तेमाल
एक्सपर्ट्स के मुताबिक त्वचा 6 टाइप की होती है। यह एक तरह की रेटिंग है। टाइप 1 व 2 वाली त्वचा काफी गोरी होती है। इन पर धूप का असर ज्यादा होता है। जितनी ज्यादा डार्क त्वचा होती है, धूप का असर सहने की क्षमता उसमें उतनी ज्या दा होती है। चूंकि भारतीयों की त्वचा आमतौर पर 4 से 6 टाइप की होती है, जिस पर 15 से 20 एसपीएफ वाले सनस्क्रीन का रेग्युलर इस्तेमाल काफी होता है। धूप में जाने से 20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाएं ताकि आपकी त्वचा इसे पूरी तरह से सोख ले। अगर आप स्विमिंग के लिए जा रहे हैं तो सामान्य सनस्क्रीन का कोई मतलब नहीं बनता, यह तुरंत धुल जाएंगा। यहां आपको जरूरत है वॉटर प्रूफ सनस्क्रीन की। स्विमिंग पूल में इस्तेमाल होने वाला क्लोरीन भी त्वचा को रूखा बना सकता है जिससे इन पर टैनिंग जल्दी होती है। अगर समुद्र, बर्फ या रेतीली जगह पर जाएं तो अधिक मात्रा में सनस्क्रीन लगाएं, क्योंकि इन जगहों पर सूरज की किरणें सीधी आपकी त्वचा पर पड़ती है।

क्या घर के अंदर भी जरूरी है सनस्क्रीनः
घर से बाहर निकलते समय तो सनस्क्रीन लगाने की सलाह दी ही जाती है, एक्सपर्ट्स यह मानते हैं कि घर के अंदर भी सनस्क्रीन लगाना फायदेमंद होता है, क्योंकि आर्टिफ़िशियल लाइट भी त्वचा पर असर डालती है। इनमें भी कुछ मात्रा में रेडिएशन होता है। घर के भीतर भी एक बार एसपीएफ 15 तक का सनस्क्रीन लगाना चाहिए।

मॉइश्चराइजर भी है जरूरी
त्वचा की प्राकृतिक नमी बरकरार रखने के लिए उसे मॉइश्चराइज करने की जरूरत होती है। आजकल ऐसे बहुत सारे मॉइश्चराइजर मार्केट में उपलब्ध हैं जिनमें एसपीएफ भी होता है। ऐसे में अगर आपकी ड्राई स्किन है तो आप अपने लिए मॉइश्चराइजर वाला सनस्क्रीन चुन सकते हैं। अथवा पहले त्वचा पर मॉइश्चराइजर लगाएं फिर सनस्क्रीन लगाएं या सनस्क्रीन में थोड़ा मॉइश्चराइजर मिलाकर लगाएं। इससे सनस्क्रीन का असर कम नहीं होता। अगर आपकी त्वचा ऑयली है या बहुत ज्यादा पसीना आता है तो चिपचिपेपन से बचने के लिए सनस्क्रीन में थोड़ा लैक्टोकैलामाइन लोशन मिलाकर लगाएं।

सनस्क्रीन में केमिकल
सनस्क्रीन में कई तरह के ऐसे केमिकल का इस्तेमाल होता है जो यूवए और यूएबी रेडिएशन को सोखते हैं। अधिकतर सनस्क्रीन में डीऑक्सीबेंज़ोन, ऑक्सीबेंज़ोन, or सुलिसोबेंज़ोन जैसे केमिकल होते हैं। हालांकि बाजार में कई हर्बल सनस्क्रीन भी उपलब्ध हैं, जिन्हें बनाने वाली कंपनियां इसके 100 पर्सेंट हर्बल और सुरक्षित होने का दावा करती हैं।

केमिकल के साइड इफेक्ट
इन केमिकल्स से कई बार त्वचा पर रिएक्शन देखे जाते हैं। इसके लक्षणों में मुहासे, जलन, छाले पड़ना, रूखापन, खुजलाहट, लाली, सूजन, दर्द और त्वचा में खिंचाव आदि षामिल है। अगर इस तरह के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। आमतौर पर इस तरह के रिएक्शन उन सनस्क्रीन से होते हैं जिनमें पैरा-अमीनोबेंज़ोइक एसिड, बेंज़ोफेनोनेस होता है। कुछ सनस्क्रीन में अल्कोहल, खुषबू या प्रिजर्वेटिव भी होता है। अगर आपकी त्वचा में एलर्जी की समस्या हो तो ऐसे सनस्क्रीन का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।

नेचुरल संसक्रीन है बेस्ट

एंटीऑक्सिडेंट से प्यारः
अपने खाने में खूब सारे बेरी, संतरे, आंवला और हरी सब्जियों जैसी वो चीजें र्प्याप्त मात्रा में शामिल करें जिनमें एंटीऑक्सिडेंट भरपूर मात्रा में होता है। यह इंटरनल सनस्क्रीन का काम करेगा और आपकी त्वचा को डैमेज से बचाएगा।

छतरी के नीचे आ जाः
ये गाना तो आपको जरूर याद होगा….. हालांकि इस गाने में कमला को भीगने से बचाने के लिए छतरी के नीचे आने को कहा जाता है, लेकिन छतरी का काम सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। दरअसल धूप की खतरनाक किरणों से बचाने में छतरी रूपी सनस्क्रीन का जवाब नहीं, क्योंकि सनस्क्रीन जहां अधिकतम 90 एसपीएफ तक आपको प्रोटेक्शन दे सकते हैं वहीं छतरी 200 एसपीएफ तक प्रोटेक्शन देती है।

कूल कॉटन का जवाब नहींः
आजकल मार्केट में कॉटन के दुपट्टों की भरमार है, जो आपको न सिर्फ कूल और ट्रेंडी लुक देते हैं बल्कि चेहरे को इनसे कवर कर आप अपनी त्वचा की नजाकत को भी बचाकर रख सकती हैं। तो देर किस बात की, ले आईये कुछ हल्के रंग वाले छोटे-बड़े स्कार्फ और दुपट्टे जो आपकी इंडियन या वेस्टर्न हर डृस के साथ मैच करेंगे। इससे आपकी त्वचा गर्म हवा के असर से भी बची रहेगी।

गॉगल्स और पानी भी रखें साथः
गर्म हवा और धूप में बाहर निकलते समय आंखों पर बड़े फ्रेम वाले गॉगल्स लगाएं । दरअसल आंखों के आस-पास की स्किन बेहद नाजुक होती है जिस पर सीधी तेज धूप और गर्म हवा का असर काफी ज्यादा होता है। इतना ही नहीं, गर्म हवा से आंखों में जलन और इसके लाल होने की समस्या भी आम है। इन दिक्कतों से बचने के लिए बड़े फ्रेम वाले गॉगल्स पहनें। इसके साथ ही अपने पास पानी की बॉटल भी रखें। बार-बार थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। इससे त्वचा में नमी और चमक बरकरार रहेगी।

सनस्क्रीन को आंखों से रखें दूर
सनस्क्रीन को आंखों के आस-पास न लगाएं, क्योंकि आंखों में जाकर यह पेपर स्प्रे की तरह असर दिखा सकता है। अगर गलती से भी आपकी आंख में सनस्क्रीन चला जाए तो आंखों को ताजे पानी से तब तक धोएं जब तक जलन न निकल जाएं। इसके बाद गुलाब जल कॉटन में डुबोकर आंखों पर रखें या खीरे का स्लाइस काटकर आंखों पर रखें इससे आंखों को आराम मिलेगा। अगर इससे भी समस्या दूर नहीं होती है तो जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाएं।

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