एक ऑपरेशन ने खत्म किया 5 सालों का स्ट्रगल

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surgery for diabetes management
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35 साल के राज बख्शी का 5 सालों से चला आ रहा स्ट्रगल खत्म हो गया है। 100 किलो वजन और 33 के करीब बीएमआई के साथ वह डायबीटीज़ की समस्या से भी जूझ रहे थे। हालत को मैनेज करने के लिए उन्हें नियमित रूप से दवाएं और इंसुलिन लेनी पड़ रही थीं। व्यवसाय से एक होटल का मालिक और फ्रीक्वेंट ट्रैवलर होने के नाते राज के लिए ये सब कर पाना आसान नहीं था। यात्रा के दौरान इंसुलिन को एक ठन्डे स्थान पर रखना बहुत आवश्यक है, लेकिन ज्यादा तर समय यह संभव नहीं हो पाता । सबके सामने इंसुलिन लेना भी काफी अजीब अनुभव होता था।

राज कहते हैं, इन सारी दिक्कतों को देखते हुए राज को मेटाबोलिक सर्जरी का सुझाव दिया गया। सर्जरी के 3 महीने के भीतर ही मैं डायबीटीज़ से पूरी तरह से मुक्त हो गया। अब सर्जरी के 2 साल बाद भी मै ठीक हूँ, और अपनी जिंदगी अच्छी तरह से बिता रहा हूँ।

फोर्टिस हॉस्पिटल के बैरिएट्रिक एंड मेटाबोलिक सर्जरी के डायरेक्टर डॉ. अतुल पीटर्स कहते हैं, भारत में डायबीटीज़ एक लाइफस्टाइल से संबंधित बीमारी है। वह बताते हैं कि पहले मध्यम आयु वर्ग वाले और बुजुर्ग इस बीमारी का शिकार होतें थे लेकिन अब यह ट्रेंड बादल गया है। आजकल उम्र इस बीमारी के दायरे को सीमित नहीं रखता। हाल के दशकों में ऐसा पाया गया है कि कम उम्र में भी लोग इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं।

डॉ. पीटर्स बताते हैं कि, डायबीटीज़ हमेशा से लाइलाज बीमारी मानी गई है, लेकिन अब यह साबित हो गया है कि ऐसा नहीं है। अब इस तरह की बीमारियों का भी आसानी से इलाज किया जा सकता है। कुछ तकनीकी बदलावों और बैरिएट्रिक सर्जरी (जो कि ओबेसिटी के मरीजों के लिए इस्तेमाल किया जाता है), के जरिये इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है। डायबीटीज़ की समस्या से निपटने के लिए मेटाबोलिक सर्जरी एक बेहतर उपाय साबित हुआ है। हालांकि इसमे पोस्ट ऑपरेटिव देखभाल भी काफी महत्वपूर्ण है।

पोस्ट ऑपरेटिव केयर के लिए कुछ सलाह
-सबसे पहले हमारे लिए यह समझना आवश्यक है कि सर्जरी कोई जादू की छड़ी नहीं होती जो मिनटों मे डायबीटीज़ की समस्या को खत्म कर देगी। ऑपरेशन सिर्फ इसका एक मुख्य अंग है, इसके अलावा उचित आहार और रेग्युलर एक्सरसाइज भी इसके लिए आवश्यक होता है।

-सर्जरी के एक महीने बाद तक मरीज को उचित खान-पान का सख्ती से ध्यान रखना चाहिए। ऑपरेशन के बाद हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के बाद 15 दिनों तक मरीज को पूरी तरह से लिक्विड डाइट पर रहना चाहिए। उसके बाद अगले 15 दिन उसे प्युरी वाला आहार लेना चाहिए, फिर धीरे-धीरे उसे वापस एक सामान्य आहार की ओर बढ़ना चाहिए ।

-मरीज को जब यह अहसास हो की अब उसका पेट भर गया है तो उसे खाना बंद कर देना चाहिए। यदि पेट भरने के बाद भी मरीज खानें पर नियंत्रण नहीं रख पाता, ऐसे में उसकी थैलियां खिंच जाती हैं और वापस उसका वजन बढ़ जाता है।

-साथ ही एक्सरसाइज इसका एक महत्वपूर्ण अंग है जो इस ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए जरुरी है। मरीज को दिन में लगभग 30 मिनट की एक्सरसाइज नियमित तौर पर करनी चाहिए। शारीरिक व्यायाम को घर के कार्यो जैसे शॉपिंग व अन्य घरेलू कामों से अलग रखना चाहिए और उसका नियमित तौर पर पालन करना चाहिए।

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