जानें ठंड से जुड़े टॉप 5 हेल्थ मिथ्स

Share:

top-5-winter-health-myths
इसमें कोई दो राय नहीं कि आजकल स्वास्थ्य को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। न्यूजपेपर, टीवी, इंटरनेट आदि की आसान पहुंच ने हर किसी के लिए सूचनाओं का भंडार खोल दिया है। इस सबके बावजूद सेहत से जुड़ी ऐसी कई बातें हैं, जिनको लेकर हममे से अधिकतर लोग अब भी भ्रम मे रहते हैं। हम यहाँ बता रहे हैं ठंड (Winter) से जुड़े ऐसे ही टॉप हेल्थ मिथ्स (Health myths)और उनसे जुड़े सही जवाब:
मिथ 1. सामान्य सर्दी-जुकाम में जरूरी है एंटीबायटिक्सः अधिकतर लोग यह मानते हैं कि ठंड में होने वाले सामान्य सर्दी-जुकाम यानी कॉमन कोल्ड को ठीक करने के लिए एंटीबायटिक्स की जरूरत होती है। यह पूरी तरह गलत है। एंटीबायटिक बैक्टीरिया का इलाज करते हैं जबकि फ्लू वायरस की वजह से होता है। सच तो यह है कि मेडिकल साइंस अब तक हर तरह के वायरस का इलाज नहीं ढूंढ सका है, कुछ खास प्रकार के वायरस का इलाज ही ढूंढा जा सका है। वायरल संक्रमण अपने आप ही ठीक हो जाते हैं क्योंकि हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता इसके खिलाफ लड़ती है। लेकिन ऐसे मामलों में जिनके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, जैसे कि डायबीटीज या कैंसर के मरीज या ऐसे लोग जिनका अंग प्रत्यारोपण हुआ हो और उन्हें इम्युनोसप्रेसिव दवाएं दी जा रही हों, उनमें मामूली समस्या भी गंभीर रूप ले सकती है। एंटीबायटिक ऐसे मामलों में दिया जाता है जिनमें सेकंडरी संक्रमण हुआ हो। कुछ लोगों को तो बिना डॉक्टर की सलाह के ही एंटीबायटिक्स खाने की आदत होती है; और एंटीबायटिक का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल होने पर शरीर में इसके खिलाफ भी प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। फिर यह काम नहीं करती। यह हमेशा याद रखें कि कॉमन कोल्ड या फ्लू का इलाज एंटीबायटिक्स से नहीं होता है। कॉमन कोल्ड से लड़ने हेतु शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं और इसके लिए आपको पोषक आहार लेना है और खूब सारा पानी पीना है।

मिथ 2. सिर्फ गर्मी दिनों में होती है सनस्क्रीन और सनग्लासेज की जरूरतः अधिकतर लोग यह मानते हैं कि उन्हें ठंड के दिनों में सूरज की किरणों से सुरक्षा की जरूरत नहीं होती क्योंकि इन दिनों तेज धूप नहीं होती। लेकिन यह गलत धारणा है। हमारी त्वचा और आंखों को ठंड के दिनों में भी उतनी ही सुरक्षा की जरूरत होती है जितनी कि गर्मियों में। बल्कि ठंड में तो हम गर्मियों की तुलना में कहीं ज्यादा समय धूप में बिताते हैं, ऐसे में हमें इन दिनों धूप से ज्यादा सुरक्षा की जरूरत होती है।
सूरज कई तरह की किरणें पृथ्वी पर भेजता है जिनमें अल्टृा वायलेट किरणें भी शामिल हैं जिसे आमतौर पर यूवी रेज कहते हैं। ये यूीव किरणें ठंड के दिनों में भी त्वचा व आंखों को उतना ही नुकसान पहुंचा सकती हैं कि जितना कि गर्मी के दिनों में पहुंचाती हैं। सनस्क्रीन और सनग्लासेज वे एक्सेसरीज हैं जो हमें यूीव रेडिएशन से सुरक्षा प्रदान करते हैं। यूवी किरणों की ही तरह इनका भी कोई निश्चित सीजन नहीं होता है। कई बार बर्फीली जगहों पर जाने के समय आंखों को अधिक सुरक्षा की जरूरत होती है क्योंकि सूरज की किरणें बर्फ पर पड़कर तेज चमक छोड़ती हैं।

मिथ 3. ठंड में व्यायाम नहीं करना चाहिएः कुछ लोग यह मानते हैं कि ठंड में व्यायामक रने से उन्हें ठंड लग जाएगी। वहीं कुछ लोग इसलिए एक्सरसाइज करना बंद कर देते हैं क्योंकि वे कंबल से बाहर ही नहीं आना चाहते। जबकि सच तो यह है कि ठंड के दिनों में आपको ज्यादा व्यायामक रने की जरूरत होती है ताकि आपकी मांसपेशियां और जोड़ सक्रिय रहें। ठंड अपने साथ वातावरण में भी बदलाव लेकर आता है जिसके चलते शरीर की नसों औ
र मांसपेशियों में अकड़न बढ़़ जाती है, परिणामस्वरूप कुछ लोगों को जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत रहती है। इस समस्या से बचाव के लिए आपको नियमित व्यायाम करने की जरूरत होती है।

मिथ 4. ठंड में अल्कोहल आपको गर्माहट देगाः यह बहुत बड़ा भ्रम है। बहुत सारे लोग यह मानते हैं कि अल्कोहल पीने से गर्माहट का एहसास होता है इसलिए ठंड के दिनों में अल्कोहल दवा का काम करता है। यह सच नहीं है। बल्कि यह ज्यादा ही नुकसानदेय साबित हो सकता है, क्योंकि इसके असर से आपको ठंड की असली स्थिति का पता ही नहीं लग पाएगा। असल मे, अल्कोहल हमारी त्वचा के नीचे स्थित नसों को डाइलेट कर देता है, ऐसे में शरीर के उपरी सतह में गर्माहट ज्यादा महसूस होने लगती है। ऐसे में त्वचा में तो गर्मी का एहसास होने लगता है मगर शरीर का मूल तापमान असल में कम ही रहता है। ऐसे में आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि आपको ठंड से सुरक्षा की जरूरत नहीं है। यानी कि अल्कोहल सिर्फ आपको गर्मी होने का एहसास कराता है, असल में यह आपके शरीर को गर्म नहीं करता है।

मिथ 5- आपके खाने की चीजों का तापमान आपकी सेहत पर असर डालता हैः यह एक आम धारणा है कि ठंड में बर्फ वाला पानी पीने से कोल्ड या फ्लू हो जाएगा। जबकि सच यह है कि आप जो भी खाते या पीते हैं, चाहे वह ठंडा हो गया गर्म शरीर के भीतर जाते ही गर्म हो जाता है। तो असल में खाने की चीजों का तापमान दरअसल आपकी सेहत पर कोई असर नहीं डालता है। हां, यह जरूर है कि अगर आपको पहले से ही गले में तकलीफ है, तो आप अगर बर्फ खाएंगे तो आपकी दिक्कत और बढ़ेगी। जब गले में दिक्कत होती है तब गर्म चीजें निगलने में आसानी रहती है। इससे आपके गले को तकलीफ नहीं होती है।

Share:
0
Reader Rating: (0 Rates)0

Leave a reply