ये 7 टिप्स रखेंगे हार्ट को हेल्दी

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top-7-tips-for-healthy-heart1. कोलेस्ट्रॉल-समझें अच्छे-बुरे का फर्क
कोलेस्ट्रॉल वैक्स जैसा एक तत्व होता है, जो हमेशा बुरा नहीं होता। शरीर को सामान्य रूप से काम करने और इसके सिस्टम की बायोकेमिकल प्रक्रियाओं के लिए अच्छे कोलेस्ट्रॉल की हम सबको जरूरत होती है। अच्छा कोलेस्ट्रॉल है-हाई डेंसिटी लीपोप्रोटीन यानी एचडीएल और बुरा कोलेस्ट्रॉल है-लो डेंसिटी लीपोप्रोटीन यानी एलडीएल, ये दोनों ही शरीर में बनते हैं। एलडीएल कोलेस्ट्रॉल बुरा होता है क्योंकि यह प्लाक बनाता है, एचडीएल कोलेस्ट्रॉल अच्छा होता है क्योंकि यह बुरे कोलेस्ट्रॉल से लड़ता है और इसे हटाता है। खून में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा का बढ़ना एक खतरनाक स्थिति होती है क्योंकि इसका परिणाम स्ट्रोक और हार्ट अटैक के रूप में सामने आ सकता है। बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए खाने में इसकी मात्रा कम करें और अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ाएं। शरीर में एचडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है शारीरिक व्यायाम करना। तो अपने जीवनशैली में बदलाव लाएं-शारीरिक सक्रियता बढ़ाएं, खाने में सैचुरेटेड फैट और जंक फूड की मात्रा घटाएं-इससे आपका दिल स्वस्थ रहेगा।

2. खाने की चीजें खरीदते समय ध्यान से पढ़ें इसका लेबलः
जब अच्छा खाने की बात आती है, इस कोशिश की शुरूआत सही चीज खरीदने से होती है। इसके लिए चीजों के पैकेट पर लगा लेबल ध्यान से पढ़ें, क्योंकि कई बार उत्पादों के बारे में गलत जानकारी भी प्रचारित की जाती है। जो भी खरीद रहे हैं उसमें मीठे और नमक का कितना इस्तेमाल किया गया है, इस पर खास गौर करें। हेल्दी होने के दावों पर आंख बंद करके भरोसा न करें। जहां तक खाने की चीजों की बात है, इसके पोषक तत्वों की अन्य ब्रांड के उत्पादों से तुलना जरूर करें। अगर आपको किसी चीज से एलर्जी है तो इसका भी ध्यान जरूर रखें। खाने की चीजों में एडिटिव और कृत्रिम रंगों के इस्तेमाल का ध्यान भी रखें, क्योंकि ये चीजें आपके दिल की सेहत के लिए अच्छी नहीं होती हैं। अपने खाने में सुरक्षात्मक चीजें शामिल करें, जैसे कि-मेथी के दाने (रोज एक चम्मच), लहसुन रोज 2-3 जौ, सोयाबीन रोज 25 ग्राम और ओट्स रोज 30 ग्राम लें। अनसैचुरेटेड फैट दिल के लिए बेहतर होता है। अनसैचुरेटेड फैट जैसे कि मूफा (ऑलिव ऑयल, कैनोला ऑयल, सरसों का तेल) और पूफा (मैकरेल, सैलमन या टूना मछली, सूरजमुखी का तेल, तिसी के बीज और मकई का तेल आदि) ये चीजें खाने में शामिल करें।

3. घटाएं तनावः
जीवनशैली में बदलाव लाकर आप तनाव कम कर सकते हैं, तनाव अंततः दिल की बीमारियों का कारण बनता है। रोज कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें। व्यवस्थित रहें, काम को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दें और चिंता करना बंद करें! लैवेंडर, कैमोमाइल टी, तुलसी, मुलेठी जैसी कुछ औषधीय चीजें आपका तनाव कम करने में मददगार साबित होंगी। ओमेगा3 फैटी एसिड तनाव और अवसाद को कम कर सकते हैं, इसके लिए तीसी के बीज, बिना नमक वाला पिस्ता, अखरोट, बादाम, सैलमन और टूना मछली खाने की सलाह दी जाती है।

4. तेल का इस्तेमालः
खाने में एक तरह के तेल का हमेशा इस्तेमाल करने के बजाए दो-तीन तरह का तेल रखें और इन्हें बदल-बदल कर इस्तेमाल करें। एक व्यक्ति को एक महीने में 450 मिली लीटर से ज्यादा तेल नहीं खाना चाहिए, यह औसत रोज अधिकतम 3 चम्मच का हो सकता है। एक साथ ज्यादा तेल न खरीदें। क्योंकि आप सोचते हैं खराब होने से पहले सारा इस्तेमाल कर लें। तेल हमेशा ठंडी, सूखी जगह पर रोशनी से दूर रखें।

5. धूम्रपान को कहें अलविदाः
आपकी धूम्रपान की आदत छुड़ाने में खान-पान की भूमिका अहम होती है। विटामिन से भरपूर चीजें जैसे कि रसीले फल, शिमला मिर्च, आमला आदि खाने से धूम्रपान करने की इच्छा कम होती है। शुगर फ्री कैंडी से अपने मुंह को व्यस्त रखें। धूम्रपान की तलब लगने पर कुछ सूखे मेवों की महक आपका ध्यान भटका सकती है। अल्कोहल, कैफीन और रेड मीट के इस्तेमाल से बचें।

6. हाइपरटेंशन पर रखें नियंत्रणः
जिन लोगों को हाइपरटेंशन होता है, उन्हें नमक के इस्तेमाल पर कड़ा नियंत्रण रखना चाहिए। अपने डाइनिंग टेबल पर नमक न रखें। खाने की रेडीमेड चीजों के इस्तेमाल से बचें क्योंकि इनमें ज्यादा मात्रा में सोडियम होता है। अपने फल, सलाद और दही में नमक का इस्तेमाल न करें। पैकेज्ड और टिंड फूड आइटम के इस्तेमाल से बचें। फ्लेवर के लिए नमक की जगह कुछ मसाले जैसे कि लाल मिर्च, हरी मिर्च, बिना नमक वाले प्याज और लहसुन पाउडर, काली मिर्च, लौंग और हींग आदि का इस्तेमाल करें।

7. डायबीटीज पर रखें नियंत्रणः
अगर किसी को डायबीटीज है अथवा वह प्री-डायबीटीज स्टेज में है तो उसे भविष्य में दिल की बीमारियां होने का खतरा कहीं ज्यादा रहता है। ऐसे में अपने ब्लड-शुगर स्तर को लगातार जांचते रहें। ब्लड ग्लूकोज का आत्म-निरीक्षण और आंकलन यानी एसएमबीजी इस हालत में बेहद आवश्यक है। अपने डायबेटोलॉजिस्ट के निर्देशों के मुताबिक, हर तीन महीने में एक बार अपना एचबीए1सी लेवल जरूर जांचें। साधारण चीनी के इस्तेमाल से बचें, खाने में कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइडृट शामिल करें, साबुत अनाज और छीमियां ज्यादा लें, इससे फाइबर की मात्रा बढ़ेगी। ऐसे फल और अन्य चीजें खाएं जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। कच्ची सब्जियां और छिलके वाले फल रोज 100 से 150 ग्राम खाएं।

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