गंभीर चुनौती बनी हुई है बचपन की डायबीटीज़

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बच्चों में डायबिटीज एक बहुत ही जटिल बीमारी है। भारत में करीब 97000 बच्चे टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित हैं। इस बीमारी के मामलों में प्रति वर्ष 3 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। बदलती जीवन शैली के फलस्वरूप टाइप 2 डायबिटीज के बढ़ते मामलों के कारण भारत को दुनिया की डायबिटीज कैपिटल कहा जाता है। हमारा सारा फोकस टाइप 2 डायबिटीज पर रहता है लेकिन बचपन में होने वाली डायबिटीज पर हमारा ध्यान नहीं जाता जो हमारे बच्चों के जीवन को सीधे प्रभावित कर रही है।

टाइप 1 डायबिटीज के प्रबंध में सुधार करने और उसके बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से नोवो नोर्डिस्क एजुकेशन फाउंडेशन( एनएनईएफ) ने नई दिल्ली में 4-5 अक्टूबर को एफ्रो -एशियन कॉन्क्लेव ऑन डायबिटीज इन चिल्ड्रन के दूसरे एडिशन का आयोजन किया। यह कॉन्क्लेव एनएनईएफ के अखिल भारतीय कार्यक्रम,’ चेंजिंग डायबिटीज इन चिल्ड्रन’ का हिस्सा है जिसे पूर्व राष्ट्रपति अबुल कलाम ने 2011 में लांच किया था।

इस कॉन्क्लेव का उदघाटन साइंस एंड टेक्नोलॉजी राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने किया। इस कॉन्क्लेव में भारत के अलावा अफ्रीका और एशिया के विभिन्न देशों के प्रमुख हैल्थकेयर प्रेक्टिशनरों, पॉलिसी मेकरों और डॉक्टरों ने टाइप 1 डायबिटीज की मौजूदा स्थिति और इससे निपटने की चुनौतियों पर चर्चा की। चेंजिंग डायबिटीज इन चिल्ड्रन, एनएनईएफ इंडिया के चेयरपर्सन , डॉ. के. एम. प्रसन्नाकुमार ने टाइप 1 डायबिटीज पर चर्चा करते हुए कहा कि वयस्कों में टाइप 2 के मामलों की बहुलता के कारण मेडिकल एजुकेशन प्रोग्राम का सारा फोकस इस टाइप की डायबिटीज के प्रबंध पर ही रहता है।

बच्चों में टाइप 1 के मामलों पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है। डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को टाइप 2 के मामलों को ट्रीट करने के हिसाब से ही प्रशिक्षित किया जाता है। इस स्थिति को बदलना जरुरी है। एनएनईएफ के मैनेजिंग ट्रस्टी ,मेल्विन डिसूजा ने कहा कि हमारे चेंजिंग डायबिटीज इन चिल्ड्रन कार्यक्रम का मकसद सभी हितधारकों के बीच टाइप 1 डायबिटीज के बारे में समझदारी को बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि भारत में हमारे 21 केंद्र और 27 सेटेलाइट केंद्र हैं जहां प्रमुख डॉक्टर टाइप 1 से पीड़ित 4043 बच्चों का इलाज करते हैं।

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