कैंसर दिवस पर आईएमए का श्वेतपत्र

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IMA against proposed national health policy
विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर इंडियन मेडिकल असोसिएशन ने कहा कि अगर शुरूआती दौर में पता लग जाए तो कैंसर की रोकथाम और इलाज संभव है। आईएमए के राष्टृय अध्यक्ष डॉ. ए. मार्तण्ड पिल्लै और महासचिव डॉ. के. के. अग्रवाल ने कैंसर से बचाव हेतु जनता के लिए एक दिशानिर्देश जारी किया।

आईएमए के पदाधिकारियों ने कहा कि, कोई भी ऐसा लक्षण जो असामान्य हो, पहली बार सामने आया हो अथवा उसके बारे में बताया न जा सके उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉ. राजेश ग्रोवर और डॉ. अशोक वैद ने कहा कि, एक सही और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कैंसर के अधिकतर मामलों से बचा जा सकता है।

जारी किए गए ये दिशानिर्देश
कैंसर की चेतावनी वाले 9 लक्षण
1. शरीर में किसी भी जगह से असामान्य ब्लीडिंग अथवा डिस्चार्ज, भले ही एक बार ही हुआ हो, खासतौर से जब इसके दर्द न हो।
2. शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ या सूजन, खासतौर से स्तन में।
3. कोई भी अल्सर अथवा घाव जो भर न रहा हो, इसमें मुंह की कैविटी भी शामिल है।
4. लगातार खांसी अथवा आवाज खराब होना।
5. निगलने में दर्द अथवा तकलीफ और अपच।
6. आंत या मूत्राशय की आदतों में बदलाव।
7. किसी निशान या मिल आदि के शेप, साइज या अपियरेंस में स्पष्ट बदलाव।
8. बार-बार सिरदर्द, आंखों की रोशनी में धीरे-धीरे कमी आना, शरीर के एक हिस्से में धीरे-धीरे कमजोरी बढ़ना।
9. बिना किसी स्पष्ट वजह के अनियमित बुखार, लगातार वनज में गिरावट, भूख में कमी और कमजोरी बढ़ना।

जीवनशैली संबंधी सामान्य सुझाव
– प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष तंबाकू अथवा धूम्रपान के इस्तेमाल से बचें।
-अपना वजन स्वस्थ सीमा में रखें और पेट का घेरा भी।
-ऐसा आहार लें जिसमें फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल हो और इसमें सैचुरेटेड व टृंस फैट की मात्रा कम हो।
-अल्कोहल के इस्तेमाल पर नियंत्रण रखें।
-शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।
-सेक्सुअली टृंसमिटेड संक्रमण से बचाव करें।
-जरूरत से ज्यादा धूप के संपर्क से बचें।
-स्तन, गर्भाशय और कोलेरेक्टल कैंसर की नियमित स्क्रीनिंग कराएं।

आईएमए दिल्ली राज्य कैंसर इंस्टीट्यूट का संकल्प
मैं रखूंगा/रखूंगी
1. खुद को तंबाकू/सुपारी आदि को किसी भी रूप में चबाकर, न धूम्रपान के रूप में, न सूंघकर और न ही डेंटल पेस्ट/पाउडर आदि के रूप में खुद से दूर रखूंगा।
2. अपने खाने में मैं रोज कई तरह की सब्जियां, फल, साबुत अनाज-लाल/पीली/हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, बींस आदि शामिल करूंगा।
3. नॉन वेजिटेरियन खाने से दूर रहूंगा और अगर मैं इसका इस्तेमाल करूंगा तो रेड मीट जैसे कि बीफ, पोर्क और लैम का इस्तेमाल नियंत्रित मात्रा में करूंगा और प्रॉसेस्ड खाने से बचूंगा।
4. खुद को ह्युमन पैपिलोमा वायरस यानी एचपीवी, हेपेटाइटिस बी वायरस यानी एचबीवी और ह्युन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस या एचआईवी के संक्रमण से दूर रखूंगा।
5. खुद को शारीरिक रूप से सक्रिय रखूंगा और रोज कम से कम 30 मिनट व्यायाम करूंगा।
6. मेरा वजन सामान्य सीमा में रखूंगा।
7. हाई एनर्जी, लो फाइबर खाने-पीने की चीजों का कम इस्तेमाल।
8. ज्यादा नमक वाल, अचारी और स्मोक्ड खाने की चीजों और नमक के साथ प्रॉसेस्ड खाने का इस्तेमाल कम।
9. अगर कभी अल्कोहल का इस्तेमाल किया तो बेहद कम मात्रा में।
10. अपने बच्चों को जन्म के बाद पहले 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध पिलाना, इसके बाद ही कोई अन्य लिक्विड या खाने की चीज देना।
11. अगर जीवन के किसी भी चरण में कैंसर हुआ तो डॉक्टर की सलाह से इलाज लेना और नियमित फॉलो अप भी कराना।
12. अगर कभी भी कैंसर हुआ तो मैं हिम्मत नहीं हारूंगा और इलाज कराकर कैंसर के खिलाफ जंग लड़ूंगा।
13. अगर मुझे कोई लक्षण भी नहीं दिखेगा तब भी साल में एक बार जांच जरूर कराउंगा।

कुछ जरूरी तथ्य
-फेफड़े के कैंसर के 90 फीसदी मामलों के लिए तंबाकू जिम्मेदार होता है।
-टोबैको का संबंध कई अन्य प्रकार के कैंसर से भ
-रेड मीट के इस्तेमालल से कोलोरेक्टर कैंसर का खतरा बढ़ता है।
-टमाटर का ज्यादा इस्तेमाल कोलोरेक्टल कैंसर के खतरे को संभावित रूप से कम करता है।
-विटामिन डी भी कोलोरक्टल कैंसर के खतरे को कम कर सकता है।
-उपयुक्त मात्रा में कैल्शियम का इस्तेमाल कोलोरेक्टल कैंसर से सुरक्षित करता है लेकिन 2000 एमजी/प्रतिदिन से अधिक कैल्शियम का इस्तेमाल प्रॉस्टेट कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है।
-खाने में फोलेट के इस्तेमाल से कोलोन और ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम होता है खासतौर उन महिलाओं में जो अल्कोहल का इस्तेमाल करती हैं।
-बेहद कम मात्रा में भी अल्कोहल का इस्तेमाल भी कोलोन, स्तन, ईसोफेगल और ओरल कैंसर के खतरे को बढ़ाता है।
-शारीरिक सक्रियता कोलोन और ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करती है।
-सामान्य से बहुत ज्यादा वनज होने की वजह से कई तरह के कैंसर का खतरा बढ़ता है।
-एचपीवी, एचसीवी, एचआईवी और हेलिकोबैक्टर पायलोरी का संबंध मानवीय कैंसर से है।
-असामान्य एचपीवी और असामान्य गर्भाशय एवं एचआईवी संक्रमण से बचाव, सुरक्षा, जांच, स्क्रीनिंग और इलाज से कैंसर का खतरा कम होता है।
-ऐस्पिरिन और एनसेड्स से एडिनोमेटस पॉल्पी और कोलोरेक्टल कैंसर से सुरक्षा देते हैं।
-टैमोक्सिफेन उन महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करता है जो हाई रिस्क जोन में आती हैं।
-एंटी-डायबिटिक डृग मेटफॉर्मिन का संबंध टाइप-2 डायबीटीज के मरीजों में कैंसर के खतरे को कम करता है।

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TagsCancer

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