120 साल तक जी सकेंगे आप

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वैज्ञानिकों का खयाल है कि मनुष्यों में न सिर्फ बुढ़ापे (aging) की प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है बल्कि उनकी उम्र को बढ़ा कर 110 से लेकर120 वर्ष तक भी किया जा सकता है। यह बात सुनने में अभी साइंस फिक्शन जैसी लगती है लेकिन रिसर्चरों ने यह साबित कर दिया है कि डायबीटिज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली  मेटफॉर्मिन नामक एक दवा से जीव-जंतुओं का जीवन काल (life expectancy) बढ़ता है और उनका मानना है कि यह दवा मनुष्यों की आयु भी बढ़ा सकती है।
मनुष्यों पर इस दवा के आयुवर्धक प्रभाव को जानने के लिए अगले वर्ष परीक्षण किए जाएंगे। अमेरिका के फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने इन परीक्षणों की अनुमति दे दी है। यदि ये परीक्षण सफल रहे तो सत्तर के आसपास का व्यक्ति जैविक दृष्टि से पचास साल के व्यक्ति जितना स्वस्थ हो जाएगा। इससे चिकित्सा के एक नए युग की शुरुआत होगी जिसमें डॉक्टर कैंसर, डायबीटिज और अल्झाइमर जैसी बीमारियों का इलाज करने के बजाय बीमारियों के मूल कारण, वृद्धावस्था का इलाज करेंगे।
 कैलिफोर्निया में बक इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन एजिंग के स्कॉटिश वैज्ञानिक गॉर्डन लिथगो इस अध्ययन के एक प्रमुख सलाहकार हैं। उनका कहना है कि यदि हम वृद्धावस्था की प्रक्रिया को लक्षित करके इसे धीमा करने में कामयाब होते हैं तो हम सब बीमारियों को भी धीमा कर सकते हैं। यह एक क्रांतिकारी बात है। प्रो. लिथगो पिछले 25 वर्षों से बुढ़ापे की प्रकिया पर रिसर्च कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले कोई  की कल्पना भी नहीं कर सकता था कि एक दिन मनुष्यों पर बुढ़ापा रोधी दवा का परीक्षण किया जाएगा। 20 साल पहले बुढ़ापा एक बड़ा जैविक रहस्य था। अब हम धीरे-धीरे जानने लगे हैं कि इस प्रकिया के पीछे क्या-क्या कारण हैं। अब आधुनिक जीव विज्ञान हमें इसका इलाज खोजने में मदद कर रहा है।
वृद्धावस्था हमारे जीवन का अभिन्न अंग नहीं है क्योंकि हमारी प्रत्येक कोशिका में मौजूद डीएनए के ब्लूप्रिंट के हिसाब से हमें हमेशा जीवित रहना चाहिए। कुछ समुद्री जीव तो कभी बूढ़े नहीं होते। लेकिन हमारे जीवन काल में अरबों बार कोशिकाओं का विभाजन होता है। शरीर के स्वस्थ रहने और उसके सुचारू रूप से काम करते रहने  के लिए कोशिकाओं का विभाजन होना जरूरी है। लेकिन कोशिकाओं के विभाजन में त्रुटियां भी होती हैं जो बढ़ती जाती हैं। कोशिकाओं में समस्या बढ़ने के बाद शरीर दोष का निवारण करने में समर्थ नहीं होता। कैंसर के मामले में कोशिकाएं म्यूटेशन अथवा परिवर्तन पर काबू पाने में असमर्थ रहती है जिससे ट्यूमर उत्पन्न होने लगते हैं। अल्झाइमर में मस्तिष्क चिपचिपी मैल को हटाने में असमर्थ रहता है। इससे डिमेंशिया पैदा होता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि डायबीटिज की दवा मेटफॉर्मिन वृद्धावस्था को रोकने वाली दवा के रूप में उभर सकती है। मेटफॉर्मिन कोशिकाओं में ऑक्सीजन के मॉलिक्यूल्स की संख्या में वृद्धि करती है। इससे कोशिकाएं ज्यादा स्वस्थ रहती हैं।   बेल्जियम के रिसर्चरों ने सी.एलिगेंस नामक राउंडवर्म पर मेटफॉर्मिन का प्रयोग किया था। उन्होंने देखा कि इन कीड़ों में बुढ़ापे की प्रक्रिया  धीमी हो गई और ये अधिक समय तक स्वस्थ बने रहे। जिन चूहों पर मेटफॉर्मिन का प्रयोग किया गया उनके जीवनकाल में 40 प्रतिशत की वृद्धि हो गई और उनकी हड्डियां भी मजबूत हो गईं।
पिछले साल  कार्डिफ यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने पता लगाया कि मेटफॉर्मिन  लेने वाले मरीज उन लोगों से ज्यादा जीवित रहे जिन्हें डायबीटिज की बीमारी नहीं थी। मेटफॉर्मिन के साथ नया क्लिनिकल ट्रायल अगले साल सर्दियों में अमेरिका में शुरू किया जाएगा। इस ट्रायल के लिए विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिक फंड एकत्र कर रहे हैं। उन्होंने 70 से 80 वर्ष की आयु वाले 3000 लोगों को इस ट्रायल में सम्मिलित करने का लक्ष्य बनाया है। ट्रायल में सिर्फ उन लोगों को ही शामिल किया जाएगा जिन्हें कैंसर,ह्रदय रोग या डिमेंशिया जैसे रोग हैं या जिन्हें इनसे पीड़ित होने का खतरा है। शिकागो स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉयस के प्रोफ़ेसर, डॉ.जे ओल्शांस्की ने एक डॉक्यूमेंट्री में नए अध्ययन को रेखांकित करते हुए कहा है कि यदि हम मनुष्यों में बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा करने में सफल हो जाते हैं तो यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। लोग बुजुर्ग होते हुए भी खुद को जवान महसूस करेंगे। स्कॉटिश वैज्ञानिक प्रो.लिथगो का खयाल है कि भविष्य में युवा लोगों को  बुढ़ापा रोधी वैक्सीन भी दी जा सकती है।
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