हर जन्म और मृत्यु का रखे रिकॉर्ड

1989
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ढाका में आयोजित क्षेत्रीय समिति के 67वें सत्र में आज डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्वी एशिया क्षेत्र के 11 सदस्य देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों और नीति निर्माताओं ने सिविल रजिस्ट्रेशन ऐंड वाइटल स्टैटिस्टिक्स (सीआरवीएस) को मजबूत बनाने के तरीकों पर चर्चा की।

2010 में 5 साल से कम आयु के करीब 76 लाख बच्चों की मृत्यु हुई, लेकिन इनमें से 2.7 पर्सेंट से भी कम बच्चों की मृत्यु को मेडिकल प्रमाण पत्र, स्वास्थ्य कर्मी से उसकी मृत्यु का कारण या फिर किसी आधिकारिक डेटाबेस में दर्ज किया गया । विश्वसनीय आंकड़ों का अभाव प्रभावी स्वास्थ्य योजना और प्रबंधन की राह का सबसे बड़ा रोड़ा रहा है।

नागरिक पंजीयन में जन्म, मृत्यु, मृत्यु की वजह और शादी जैसे जीवन के प्रमुख अवसरों का ब्योरा रहता है। इन रिकॉर्ड से जो आंकड़े मिलते हैं वे राष्ट्रीय प्रगति का आकलन करने और आगे कदम बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी होते हैं। इन आंकड़ों को नियमित और निरंतरता से रिकॉर्ड किया जाए यह सुनिश्चित करने का सबसे अच्छा तरीका राष्ट्रीय आरवीएस सिस्टम है। यह सिस्टम कानूनी तौर पर अनिवार्य है और इसका संचालन सरकार करती है, जिसमें उसकी मदद सरकारी एजेंसियां, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, पुलिस विभाग और स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र मिलकर करते हैं।

डब्ल्यूएचओ की क्षेत्रीय निदेशक (दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र) डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह कहती हैं, ’’हमें हर जिंदगी का हिसाब रखना है और इसके लिए जरूरी है कि हर जन्म और मृत्यु का पंजीकरण किया जाए। जब तक हर जन्म का रिकॉर्ड नहीं रखा जाएगा, तब तक स्वास्थ्य के सभी मानकों का आकलन गलत ही रहेगा। सीआरवीएस सिस्टम ही इकलौता जरिया है, जिससे जन्म, मृत्यु और मृत्यु की वजह, के निरंतर, अनिवार्य और किफायती ढंग से आंकड़े जुटाए जा सकते हैं।’’ उन्होंने कहा, ’’एक मजबूत और विश्वसनीय आरवीएस सिस्टम विभिन्न क्षेत्रों विशेष तौर पर स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय योजना बनाने में अहम भूमिका निभाता है।’’ स्वास्थ्य क्षेत्र में मिलेनियम डेवलपमेंट गोल जैसे समयबद्ध नतीजे हासिल करने के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है।

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